Bhartiya Parmapara

इंद्रजाल के लाभ और पूजा विधि | इंद्रजाल को घर...

भारतीय लोक और तांत्रिक परंपराओं में इंद्रजाल के अनेक लाभ बताए गए हैं। इनमें प्रमुख हैं— 1. संतान प्राप्ति और पारिवारिक बाधाओं के लिए: कुछ पारंपरिक मान्यताओं में इंद्रजाल को संतान प्राप्ति और पारिवारिक बाधाओं से संबंधित साधनाओं में उपयोगी माना गया है। इसे वि...

इंद्रजाल क्या है? जानिए प्राचीन रहस्य, तंत्र...

इंद्रजाल शब्द प्राचीन काल से ही कौतूहल, रहस्य, आश्चर्य और अद्भुत शक्तियों से जुड़ा रहा है। भारत की प्राचीन संस्कृति और ग्रंथों में इंद्रजाल का उल्लेख विभिन्न अर्थों और स्वरूपों में मिलता है। कहीं इसे इंद्रियों के जाल या आवरण के रूप में समझाया गया है, तो कहीं यह जादुई...

108 मनकों की माला का रहस्य | 108 बार मंत्र जा...

सनातन धर्म में माला से मंत्र जाप करने की परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है। जब भी हम भगवान का नाम जपते है या मंत्र जाप करते हैं, तो हमेशा 108 मनकों की माला से करते है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर माला में 108 मनके ही क्यों होते हैं? और 108 बार मंत्र जाप करन...

अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए अभिवादनशील...

अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए अनिवार्य है अभिवादनशीलता  
पुराणों में महर्षि मार्कंडेय की एक कथा मिलती है। महर्षि मार्कंडेय मृकंडु के पुत्र थे। महर्षि मार्कंडेय जब मात्र पाँच वर्ष के थे तभी उनके पिता मृकंडु को पता चला कि मेरे पुत्र की आयु तो केवल छह म...

शंखनाद

भारतीय संस्कृति में शंख ध्वनि को शुभ व मंगल सूचक माना गया है। ऋषि श्रृंग ने लिखा है कि छोटे-छोटे बच्चों के शरीर पर छोटे-छोटे शंख बांधने तथा शंख में जल भरकर अभिमंत्रित करके पिलाने से वाणी दोष नहीं होता है। बच्चा स्वस्थ रहता है। पुराणों में शंख को चन्द्रमा और सूर्य के स...

सिंदूर क्यों लगाती हैं महिलाएं?

स्त्रियों द्वारा मांग में सिंदूर लगाना - भारतीय वैदिक परम्परा खासतौर पर हिन्दू समाज में शादी के बाद हर सुहागिन महिला को मांग में सिन्दूर भरना आवश्यक है। सिन्दूर द्वारा मांग भरा जाना सुहाग का प्रतीक समझा जाता है। वर्तमान समय में सिन्दूर के स्थान पर कुंकुम अन्य कॉस...

वैदिक स्वास्तिक का वैज्ञानिक और सांस्कृतिक मह...

स्वास्तिक अत्यन्त प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति में मंगल प्रतीक माना जा रहा है। अतः कोई भी शुभ कार्य करने से पहले स्वास्तिक चिन्ह अंकित करके उसका पूजन किया जाता है। स्वास्तिक का अर्थ है - अच्छा या मंगल करने वाला । “अमर कोश” में भी इसका...

ॐ का वैज्ञानिक महत्व: भारतीय संस्कृति में छिप...

ॐ का प्रयोग करना - भारतीय संस्कृति में प्राचीन ऋषि मुनियों द्वारा ॐ का प्रयोग किया जाता था, आज भी ॐ का प्रयोग किया जाता है। ॐ के प्रयोग का हमारे जीवन में क्या महत्व है? इसका प्रयोग क्यों किया जाता है? इसके पीछे वैज्ञानिकता क्या है? अनेक प्रश्न हमारे सामने है ? ॐ का प्...

नमस्कार का अर्थ, महत्व और वैज्ञानिक कारण

नमस्कार शब्द नमः+कार दो शब्दों से मिलकर बना है। नमस्कार का आशय है हम संसार के कारक को हमेशा सादर नमन करते हैं क्योंकि हमारी निज कोई सता नहीं है जो कुछ भी इस संसार में है वह इस संसार के कर्ता नियंता का है। अतः हमारा दूसरे व्यक्ति से जो मिलन हुआ है वह उस परमसत्ता की कृप...

प्रदक्षिणा का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व

हम मंदिर में कहीं भी जाते हैं तो प्रदक्षिणा जरूर करते हैं। यह प्रदक्षिणा क्यों की जाती है क्योंकि जब हम ईश्वर के आस-पास परिक्रमा करते हैं तो हमारी तरफ ईश्वर (प्रत्यक्षतः प्राकृतीय) की सकारात्मक शक्ति आकृष्ट होती है और जीवन की नकारात्मकता घटती है।

भारतीय परंपराओं के पीछे वैज्ञानिक कारण

भोजन की शुरुआत तीखे से और अंत मीठे से करना - जब कोई धार्मिक या पारिवारिक अनुष्ठान होता है तो भोजन की शुरुआत तीखे से और अंत मीठे से होता है। यह भारतीय परम्परा रही है। लोगों का मानना है कि अन्त में हमेशा मीठा खिलाना चाहिए जिससे हमारे संबंधों में मिठास बनी रहे।

विवाह संस्कार – भारतीय संस्कृति में विवाह का...

विवाह स्त्री और पुरुष के बीच अनोखा एवं आत्मिक, भावनात्मक संबंध है। विवाह को हम दूसरा जन्म ही मानते हैं क्योंकि विवाह के पश्चात स्त्री एवं पुरुष दोनों का संपूर्ण जीवन बदल जाता है। विवाह का शाब्दिक अर्थ ही "विशेष उत्तरदायित्व" वहन करना। हमारी भारतीय संस्कृति में जन्म से...

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